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آراء وتحليلات تقارير

من تقرير لجنة التحيقق الدولية الخاصة بسوريا

دعت لجنة تابعة للأمم المتحدة للتحقيق في جرائم الحرب تركيا، إلى كبح جماح المسلحين السوريين الذين تدعمهم في شمال سوريا وربما نفذوا عمليات خطف وتعذيب ونهب لممتلكات مدنية.

وقالت اللجنة اليوم الثلاثاء، إن “نقل مواطنين سوريين إلى الأراضي التركية لمحاكمتهم بعد احتجازهم من قبل مسلحي المعارضة قد يرقى إلى جريمة حرب تتمثل في الترحيل غير القانوني”.

من جهته، قال رئيس اللجنة باولو بينيرو: “مسلحو المعارضة المدعومون من تركيا ربما ارتكبوا جرائم حرب في عفرين ورأس العين والمناطق المحيطة بها تتمثل في أخذ الرهائن والمعاملة القاسية والتعذيب والاغتصاب”.

وأضاف: “يتعين على تركيا العمل على منع هذه الانتهاكات وضمان حماية المدنيين في المناطق الخاضعة لسيطرتها”.

بدوره، قال عضو اللجنة هاني مجلي، إن “تركيا تتمتع بنفوذ حيث أنها مولت ودربت وسمحت لقوة مسلحة بدخول سوريا من تركيا”.

وأضاف: “لا نستطيع القول إن تركيا هي المسؤولة عنهم وإنها تصدر الأوامر وتسيطر عليهم لكننا نعتقد أن بوسعها أن تستخدم نفوذها على نحو أكثر بكثير للسيطرة عليهم وبالتأكيد الضغط عليهم للكف عن الانتهاكات التي ترتكب والتحقيق معهم”.

وفي تقرير يشمل النصف الأول من عام 2020، أكدت لجنة التحقيق بشأن سوريا، أن “عمليات الاغتيال والاغتصاب للمدنيين من جانب جميع الأطراف والتي تميزت بالصبغة الطائفية تشهد تصاعدا في الأزمة التي بدأت في عام 2011”.

المصدر: “رويترز”